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Vastu Shastra In Architecture | वास्तु शास्त्र हिंदी में


प्रस्तावना

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आर्किटेक्चर में Vastu Shastra का अपना एक महत्व है। वास्तु शास्त्र एक बहुत व्यापक विषय हैं, जिस का विस्तृत विवरण एक पोस्ट में प्रस्तुत करना संभव नहीं है, इसलिये हमने इस विषय को एक अलग कॉलम (VASTU & ARCHITECTURE) दिया है, जिसमे आगे आप वास्तु से संबंधित कई पोस्ट Hindi / English दोनों भाषाओ में देख सकते है। इस पोस्ट में, वास्तु तथा आर्किटेक्चर में सबंधVastu Purusha Mandala क्या है? वास्तु शास्त्र के Basic Elements या पंचमहाभूत क्या है? दिशाओँ का महत्व क्या है? वैदिक आर्किटेक्चर के Elements आदि को वर्णित किया गया है।

आर्किटेक्चर में वास्तु का महत्व

  • वास्तु एक ऐसी जगह है जहाँ लोग रहते हैं और अपने कार्यों को संपन्न करते हैं। भारतीय इतिहास के पाठ्यों के अनुसार, ‘वास्तु’ का अर्थ है ‘घर के लिए संतुलित भूमि’।
  • संस्कृत में, ‘वास्तु’ का अर्थ है ‘प्रकृति (Nature), पर्यावरण या परिवेश (Environment or surroundings)’ और ‘शास्त्र’ का अर्थ है ‘प्रणाली‘(System).
  • वास्तु शास्त्र एक प्राचीन कला और विज्ञान है, जिसमें किसी इमारत के डिजाइन या निर्माण के कुछ बुनियादी सिद्धांत(basic principles) का अभ्यास शामिल हैं। जो लोगों और प्रकृति के बीच एक सामंजस्यपूर्ण संतुलन(harmonious balance) भी बनाते हैं तथा खुशी, स्वास्थ्य, धन और समृद्धि को आकर्षित करते हैं।
  • वास्तु शास्त्र का आधार वेद तथा प्राचीन भारत की वास्तुकला है, इसका सामन्य अर्थ रहने योग्य स्थान है या रहने के लिए निवास है।

वास्तु-पुरुष-मंडल

वास्तु पुरुष मंडल एक चार्ट या आरेख (diagram) है, जो 45 भगवानो के स्थानों की स्तिथि (बाहरी और 32 तथा अंदर की और 13) को दर्शाता है। यह एक सामान छोटे खानो (9 X 9 =81) या एक विशेष भगवान के लिए एक खाने का उपयोग कर तैयार किया जाता है। इसके अनुसार, घर या किसी स्थान को संतुलित वातवरण , सूर्य की रौशनी, वेंटिलेशन , तथा गोपनीयता के साथ डिज़ाइन किया जाता है।

  • वास्तु ब्रह्मांड का एक मॉडल है जो हमे किसी एक भवन या स्थान को डिजाइन करने के लिए मूल सिद्धांत प्रदान करता है।
  • पुरुष इस रचनात्मक ब्रह्मांड में ऊर्जा(energy), चेतना(consciousness) और तार्किक औचित्य(logical rationale) का प्रतिनिधित्व करने वाला सार्वभौमिक(universal) व्यक्ति है।
  • मंडल ब्रह्मांड की योजना की एक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति(symbolic expression) है जो लोगों, प्रकृति और संरचना के बीच एक संबंध बनाती है।
वास्तु पुरष
वास्तु पुरुष

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वास्तु शास्त्र के Basic Elements या पंचमहाभूत

यह बिल्डिंग तथा गाँवों या शहर की योजना बनाने के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करता है। अर्थात वास्तु शास्त्र विध्वंसक तत्वों तथा विकरणों से मुक्त कर ब्रह्मांड की ऊर्जा के साथ सामंजस्य स्थापित करता है। यह पांच Basic Elements या पंचमहाभूत के आधार पर सामंजस्य स्थापित करता है, जो की इस प्रकार है:-

  • पृथ्वी (Earth)
  • आकाश (Space )
  • वायु (Air)
  • जल (Water )
  • अग्नि (Fire )

वास्तु शास्त्र के सिद्धांत भवन के डिजाइन के साथ-साथ शहरों और कस्बों की योजना के लिए दिशानिर्देश प्रदान करते हैं। वास्तु शास्त्र के मूलभूत सिद्धांत जिस पर वास्तु का वैदिक विज्ञान निर्भर करता है इस प्रकार है :

1 .दिशाओँ का महत्व

वास्तु में, पूर्व और उत्तर दिशा को सबसे महत्वपूर्ण दिशा माना जाता है क्योंकि इसकी मान्यता है कि सूर्य की किरणें पृथ्वी पर जीवन का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं। सूर्य का उन्मुखीकरण(orientation) दिन-प्रतिदिन के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

2 .साइट की डिजाइनिंग और योजना (वास्तु पुरूष मंडल पर आधारित)

सरल शब्दों में, वास्तु का अर्थ है ‘पर्यावरण या आसपास’, पुरुष का अर्थ है ‘ऊर्जा’ और मंडला का अर्थ है ‘एक चार्ट जो कि उन्मुखीकरण(orientation) के लेआउट के साथ-साथ विभिन्न भगवानों के स्थानों से संबंधित है।

3. अनुपात और माप (मान):

अनुपात और माप भारतीय वास्तुकला में पुराने टूल्स हैं और यह सभी रचनात्मक गतिविधियों के लिए भी आवश्यक होते है। आयदी गणना, वेद का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अयादी गणना भवन डिज़ाइन के साथ-साथ भवन निर्माण के लिए एक तकनीकी अनुप्रयोग है, यह गणना साइट के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम करती है जैसे सूरज का उन्मुखीकरण, हवा की दिशाएं, प्राकृतिक विशेषताएं या गुण, आदि।

वास्तु-पुरुष-मंडल
वास्तु-पुरुष-मंडल

4 .भवन का सौंदर्यशास्त्र (Aesthetic of the building):

सौंदर्यबोध ‘भवन का चरित्र‘ है। किसी ईमारत के संरचनात्मक पहलू (aspects) भवन के प्लान से इमारत के ऊर्ध्वाधर खंड (Vertical Section) तक एक कविता या कहानी की तरह दिखते हैं जो एक लय में बहते हैं।

5 .वैदिक वास्तुकला के तत्व:

यह भवन संरचनाओं के छह मुख्य घटकों (components) पर आधारित है:-

  1. अधिस्थाना (भवन का आधार या मंच)
  2. स्तम्भ (स्तंभ की इमारत की हड्डी)
  3. प्रस्तारा (भवन की सजावटी गर्दन)
  4. कर्ण (पंख- भवन की प्रकृति को दर्शाता है)
  5. शिखर (छत- भवन का मुखिया)
  6. स्तूप (गुंबद- भवन का मुकुट)
डिजाइनिंग में वास्तु शास्त्र का उपयोग
डिजाइनिंग में वास्तु शास्त्र का उपयोग

उपसंहार

यह पोस्ट वास्तु शास्त्र के बारे में एक मूल परिचय से संबंधित थी, जैसा कि हम सभी जानते हैं कि यह एक बहुत बड़ा विषय है जिसमें तत्वों, देवताओं के स्थान, हवा और सूर्य की दिशाओं, आदि के बारे में विभिन्न विवरण हैं, हम वास्तु शास्त्र से संबंधित सभी विषयों को आगामी पोस्ट में विस्तार से वर्णित करेंगे।

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